Wednesday, April 10, 2013

तेरे क़दमों की आहट

तेरे क़दमों की आहट में सुनता रह गया
तेरी पायल की छन छन में जैसे खो गया

तेरे पांव को छूने को ख्वाइश दिल में तो थी मगर
हवा के झोंके में एक पत्ता कहीं दूर उड़ गया 

कैसे हैं ये जज़्बात

कभी पास आके
नज़रें मिलाके
हाथों में लेके हाथ
कह दो न दिल की बात

दिल को जोड़ें जो दिल से
कैसे हैं ये जज्बात

नज़दीक तुम जब
होते हो मेरे
धड़कन बेकाबू
सुने ना कोई मेरी बात

कैसे हैं ये जज़्बात

अब दूरियां ये
न सह पायेंगे हम
चलो कहीं दूर चलें
ले हाथों में तेरा हाथ

दिल  है बेकाबू
न मुझको समझ है
ना तुझको समझ है
कैसे हैं ये जज़्बात

सुन ले रे दिल की बात
कैसे हैं ये जज़्बात ....