Sunday, May 29, 2011

फुर्सत के आलावा कुछ भी नहीं

खुशनसीब हो जो दर बदर रहे हो बरसों से
अपनी ज़िन्दगी में फुर्सत के आलावा कुछ भी नहीं

Saturday, May 28, 2011

ऐ जानेमन, ओ जानेमन

सुन जानेमन, जानेमन
कहता है मेरा मन
तेरी आखों में डूब के
खो जाऊं मैं सनम

जिस दिन से तुझको देखा
पागल है तन और मन
तेरी आखों में डूब के
खो जाऊं मैं सनम

जानेमन, ऐ जानेमन

कल सपनो में तू आई थी
आग मैं है तन-औ-बदन
तेरे प्यार मैं डूब के
खो जाऊ जानेमन

हर आहट ये लगे है
कहे तू है मेरा मन
तेरे प्यार में डूब जाने दे
खो जाने दे जाने मन

ऐ जानेमन, ओ जानेमन

कह दो परिंदों को

आज परिंदों को कह दो उड़ के कहीं दूर चले जाएँ
यहाँ के आसमान पर अब हमारी उड़ने की बारी है

आज वक़्त हमारा है आज जोश हमारा है
ख़ाली कर दो रास्तों को अब हमारी बड़ने की बारी है

कह दो परिंदों को ....

मैं एक परिंदा हूँ

मैं एक परिंदा हूँ उड़ता फिरून मैं मुझको इसकी क्या खबर
चलता चलूं मैं फिरता आवारा जहाँ ले चले जीवन सफ़र

तुम आओ तो बनके साथ हमराही उड़ेंगे हम डगर डगर
ना आओ तो याद रखेंगे तुमको हर मंजिल हर सहर

मैं एक परिंदा हूँ उड़ता फिरून ...