Saturday, May 28, 2011

कह दो परिंदों को

आज परिंदों को कह दो उड़ के कहीं दूर चले जाएँ
यहाँ के आसमान पर अब हमारी उड़ने की बारी है

आज वक़्त हमारा है आज जोश हमारा है
ख़ाली कर दो रास्तों को अब हमारी बड़ने की बारी है

कह दो परिंदों को ....

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