Thursday, August 13, 2009

ओये में क्या करुँ

मुझको हो गया इश्क का रोग
ओये में क्या करुँ


तेरे लाल लाल हैं गाल
ये तो हो गया कमाल
मेरा जिगरा हुआ बेहाल
ओये में क्या करुँ

तेरे नाज़ुक गुलाबी होंठ
दिल में करते सीधी चोट
मेरा दिल तो हुआ बीमार
ओये में क्या करुँ

तेरे लंबे काले बाल
मेरे दिल का बुरा है हाल
करते ये हैं बड़े सवाल
ओये में क्या करुँ

मुझको हो गया इश्क का रोग
ओये में क्या करुँ

तेरे माथे की ये बिंदिया
उड़ गई मेरी तो है निंदिया
चमके रात में जैसे जुगनू
ओये में क्या करुँ

आजा अब तो मिलने आजा
कहे तो ले आता बेन्ड बाजा
मुझको हो गया इश्क का रोग
ओये में क्या करुँ

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