Thursday, August 13, 2009

अलविदा

जा रही हो तो जाओ ओ सपना,
जाने वाले को कौन रोकेगा हेना?
बस जाते हुए इतना याद रखना,
जाते समय दरवाजा लगा देना।
अलविदा !

ओये में क्या करुँ

मुझको हो गया इश्क का रोग
ओये में क्या करुँ


तेरे लाल लाल हैं गाल
ये तो हो गया कमाल
मेरा जिगरा हुआ बेहाल
ओये में क्या करुँ

तेरे नाज़ुक गुलाबी होंठ
दिल में करते सीधी चोट
मेरा दिल तो हुआ बीमार
ओये में क्या करुँ

तेरे लंबे काले बाल
मेरे दिल का बुरा है हाल
करते ये हैं बड़े सवाल
ओये में क्या करुँ

मुझको हो गया इश्क का रोग
ओये में क्या करुँ

तेरे माथे की ये बिंदिया
उड़ गई मेरी तो है निंदिया
चमके रात में जैसे जुगनू
ओये में क्या करुँ

आजा अब तो मिलने आजा
कहे तो ले आता बेन्ड बाजा
मुझको हो गया इश्क का रोग
ओये में क्या करुँ

सवाल

सवाल इस बात का नहीं है की क्या सवाल है
सवाल तो इस बात का है की क्यों सवाल है

कभी शब्दों से कुछ कहो

कभी शब्दों से कुछ कहो ,
सच्चा नहीं झूठा ही सही।
पर कहो तो कभी,
शब्दों से कभी कुछ कहो ।

दिन रात तुम्ही को देख कर गुजारी है,
अब तो ये जिंदगी बस याद तुम्हारी है ।
बाकि दो चार दिन भी किसी तरह गुजर जायेंगे ,
फिर सोचेंगे की क्या खोएंगे और क्या पाएंगे ।

देखो अब नाटक छोड़ो और कभी शब्दों में कुछ कहो,
माना हमसे हुई थी गिला पर जिंदिगी भर की सजा मत दो ।
आओ अब खिलखिला के हसो और मुझसे बातें करो ,
बता दो अपनी सारी कहानी और अब यूँ न डरो।

जाने भी दो अब कुछ देर में ये रात भी कट जायेगी,
क्या तुम्हारी फूलों वाली तस्वीर से कभी आवाज़ आएगी ?

Tuesday, January 20, 2009

संजू बाबा और नारी का अपमान

संजू बाबा संजू बाबा
बज़ गया दिमाग का बाजा
अमर भइया लगे दिए आग
आप ने दिया बस वचन दाग

संजू बाबा संजू बाबा
बज गया दिमाग का बाजा
जैसे बजा था सालों पहले
जब AK47 से आप थे खेले

ऐसा बजा अब फिर से बाजा
कर दिया स्त्री अपमान क्यों बाबा ?
क्यों किया ये अपराध ये ताज़ा ?
संजू बाबा संजू बाबा

अब 'अमर' बन गए दुर्वचन ये तेरे
पश्चाताप तू कितना भी कर ले
नहीं पड़ेगी 'मुलायम' कोई नारी
बोले चाहे तू कितना भी सॉरी

संजू बाबा संजू बाबा
एक बार अपनी माँ को कर लेता याद
अब क्या फायदा बोलने के बाद
अब तो बज गया तेरा बाजा

संजू बाबा संजू बाबा ...