Friday, December 5, 2008

पीते तो बोतल से हैं

गलिव ने कहा था:
जिंदगी जिन्दादिली का नाम है
मुर्दा दिल क्या ख़ाक जिया करते हैं

हमने कहा:
अरे गालिब पीते तो बोतल से हैं,
गिलासियों से कोई जाम पिया करते हैं?

5 comments:

  1. शुरुआत तो दमदार है. स्वागत ब्लॉग परिवार और मेरे ब्लॉग पर भी.

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  2. सुन्दर रचना है लिखते रहें। वर्ड वेरिफ़िकेशन हटा लें ताकि टिप्पणी करने में लोगों को आसानी रहे। जितनी भी टिप्पणियाँ आएँ, उन सबकी तस्वीरों पर क्लिक करके उन ब्ला॓गरों के प्रोफ़ाइल में जावें और उनके वेब पेज में जाकर उन्हें पढ़ने के बाद, पोस्ट अ कमेण्ट या टिप्पणी करें पर डबल क्लिक करके टिप्पणी करें। नेट से बारहा फ़ोण्ट डाउनलोड करके उसे हिन्दी में सक्रिय करके टिप्पणियाँ करें। नए ब्लागर्स की सुविधा के लिए :-
    www.lal-n-bavaal.blogspot.com के सौजन्य से। धन्यवाद।

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  3. बहुत सुंदर...आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है.....आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे .....हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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  4. ye mat samajh lijiyega ki kisi nashe meN aapke blog ko follow kar liya hai...

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