Monday, December 8, 2008

चले चलो भाई चले चलो.

ये एक कविता जो में अपने एक साल के बेटे रोहन के लिए लिखी है:

चले चलो भाई चले चलो, छोटे बच्चे चले चलो।
प्यारे प्यारे सुंदर सुंदर, छोटे बच्चे चले चलो।

चले चलो भाई चले चलो, अपनी धुन में चले चलो।
चुन्नू मुन्नू पप्पू गुड्डू, सब कोई मिल के चले चलो।

एक लाइन में चलो या फिर बिना लाइन के चले चलो।
हो तुम अपनी मर्जी के मालिक जैसे समझा चले चलो।

आसमान से तोड़ो तारे, या समुन्दरों में गोता मारे।
लेकर अपनी आशाओं को हर डगर के आगे चले चलो।

चले चलो भाई चले चलो छोटे बच्चे चले चलो।
प्यारे प्यारे सुंदर सुंदर छोटे बच्चे चले चलो।

जिस को कोई देखा नहीं उस जगह के आगे चले चलो।
पिंकी रानी गुडिया बोबी अब उड़ उड़ के सब चले चलो।

जंगल हो या शहेरी सड़कें जायेगे हर उस जगह पे हम
कैसा डर? कोई रोके नहीं? बस गाना गाते चले चलो।

चलो दुनिया के सारे बच्चो सब मिल मिल के अब चले चलो।
रशिया, अमरीका, जापान या भारत सब एक साथ ही चले चलो।

जीवन है तुमसे ही आगे जीवन नैया में चले चलो।
छोटे छोटे प्यारे बच्चो अब साथ साथ सब चले चलो।

चले चलो भाई चले चलो छोटे बच्चे चले चलो।
प्यारे प्यारे सुंदर सुंदर छोटे बच्चे चले चलो।

चले चलो भाई चले चलो...

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