Friday, December 5, 2008

तुम आना

तुम आना पीछे से
चुपके से बिना किसी आहट के

चुप कर देना पायल को
बोल देना चूडियों को की न खनके
तुम आना पीछे से
चुपके से बिना किसी आहट

शाम के समय
जब में देखता रहूँगा डूबता सूरज को
तब तुम आना पीछे से
चुपके से बिना किसी आहट के

तुम आना दबे पाँव
पीछे से छपके से
और आके कर देना
अपने नरम हाथों से
बंद मेरी आखों को

और पूछना अपने नरम होठों से
में कौन हूँ? में कौन हूँ?
तुमरे स्पर्श को, पहचान कर भी
नहीं पहेचान पाऊँगा में
और बन के रहूँगा अनजान

तुम आना पीछे से चुपके से
बिना किसी आहट के
ऐ मौत तुम आना पीछे से
चुपके से बिना किसी आहट के

तुम आना ...

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